“तो आप लोग वहाँ बैठे हुए आखिर क्या कर रहे हैं ?” अकबर ने तनिक क्रोध में कहा- “इन छोटे-छोटे किलों की रक्षा के लिए सल्तनत (साम्राज्य) की ओर से जो इतना रुपया खर्च किया जा रहा है, वह क्या इसीलिए कि आप लोग मिट्टी के माधो बने रहें ! इसी वीरता पर घमण्ड था…
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“यही मैं भी कहने जा रहा था!” राजा भगवानदास बोले । “आप लोग इस विशाल मुग़ल राज्य की नींव हैं ।” अकबर ने गम्भीर स्वर में कहा— “सोचा था, सारे भारत को एक सुसंगठित साम्राज्य के रूप में संगठित कर दूंगा । पर लगता है, मेरा सपना साकार नहीं हो सकता । मेवाड़ के राणा…
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