महाराणा प्रताप भाग-22

महाराणा प्रताप भाग-22

“यही मैं भी कहने जा रहा था!” राजा भगवानदास बोले ।

“आप लोग इस विशाल मुग़ल राज्य की नींव हैं ।” अकबर ने गम्भीर स्वर में कहा— “सोचा था, सारे भारत को एक सुसंगठित साम्राज्य के रूप में संगठित कर दूंगा । पर लगता है, मेरा सपना साकार नहीं हो सकता । मेवाड़ के राणा प्रताप का बढ़ता हुआ प्रताप हमारी सरदर्दी का कारण बनता जा रहा है, राजा साहब !”

“राणा प्रताप !” राजा टोडरमल ने कहा —“हम लोगों ने भी उसकी कार्यवाहियों से कुछ समाचार सुने है, सम्राट ! वह अपनी बात का बड़ा धनी है ।”

“कुछ भी हो, राजा साहब !” अकबर ने जैसे जागकर अपने हाथ पर हाथ मारते हुए कहा –“हमारी बात और इच्छा का भी तो कुछ मुल्य है !”

“आपकी बात कौन टाल सकता है, सम्राट !” राजा भगवानदास बोले –“प्रताप को पहले समझाया जा सकता है । यदि वह न समझे, तो उसकी अक्ल को शक्ति से ठिकाने भी तो लगाया जा सकता है !” एक क्षण रूककर राजा भगवानदास ने फिर कहा —“कुँवर मानसिंह की तो इच्छा है कि अपनी बहिन का विवाह राणा प्रताप के बेटे कुँवर अमरसिंह के साथ करे । हम लोग यह रिश्ता जोड़ने का प्रयत्न करना चाहते है । यदि यह रिश्ता हो गया, तो फिर प्रताप कोई समस्या न रह जायेगा !”



“कर देखिये !” अकबर बोला —“पर आप याद रखिये, अकबर के साले की बेटी और भांजे की बहिन के साथ प्रताप अपने बेटे का रिश्ता कभी भी स्वीकार नहीं करेगा !”

“सम्राट !” राजा भगवानदास ने केवल इतना ही कहा ।

“आप कोशिश अवश्य करिये । पर यह याद रखकर करिये, कि मेवाड़ का यह सपूत किसी दूसरी ही मिट्टी का बना है ।” अकबर ने फिर कहा ।

“आप तो प्रताप की प्रशंसा कर रहे हैं, सम्राट !” राजा टोडरमल ने कहा ।

“सच्चाई से आँखे तो नहीं मूंदी जा सकती, राजा टोडरमल !” अकबर ने फीकी हंसी हँसते हुए कहा —“और कहिये मेवाड़ से आने वाले राजस्व (लगान) की क्या स्थिति है ?”

“राजस्व !” राजा टोडरमल ने कहा —“मेवाड़ की बनाम और बैरिस नदियों से सींची जाने वाली भूमि आज हरी-भरी होने के स्थान पर वीरान पड़ी है, सम्राट ! फिर वहां से राजस्व कैसा ?”

“राजा साहब !” अकबर जैसे चौंक पड़ा ।

तभी प्रमुख सेनापति महावत खां और प्रमुख सेनानायक शाहबाज़ खां के साथ सेनाध्यक्ष राजा मानसिंह ने प्रवेश किया ! उन्हें देखते ही अकबर ने एकदम कहा —-

“राजा मानसिंह ! आप मुग़ल सेना के अध्यक्ष हैं । इतनी विशाल सेना के रहते हुए भी मेवाड़ से राजस्व का आना बंद हो जाय ! इससे अधिक अपमान मुग़ल साम्राज्य का और क्या हो सकता है ?”

“सम्राट !” मानसिंह ने कहा ।

“जहाँपनाह !” महावत खां और शाहबाज़ खां ने एक साथ कहा । वे उत्तेजित थे ।

“सम्राट ! जहाँपनाह !” अकबर बुदबुदाया —“ये सुनते-सुनते मेरे कान पक गए है । आप लोगों की तलवारों का पानी उतर गया है क्या ? हम कुछ नहीं सुनना चाहते ! मेवाड़ से राजस्व का आना शीघ्र जारी होना चाहिए ।”

“सम्राट !” राजा मानसिंह ने नम्रता से झुकते हुए कहा —“मैं प्रताप को समझाने का एक अवसर चाहता हूँ । आपकी आज्ञा से मैं कल ही दक्षिण (शोलापुर) विजय के लिये जा रहा हूँ । वहां के नवाबों का विद्रोह बढ़ता ही जा रहा है । वहां से लौटते हुए मैं एक बार प्रताप से मिलना चाहता हूँ । यदि वह न समझा, तो उसका सिर शक्ति से कुचल दिया जायेगा !”

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2 Responses

  1. How can i buy Maharan Pratap DVD
    I wan to watch whole story in detail can you help me to buy this

    Regards
    Dinesh
    9871727882

  2. Christine says:

    Hey, that’s the gresteat! So with ll this brain power AWHFY?

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